राजेंद्र कुमार: हिन्दी सिनेमा के चमकते सितारे

प्रारंभिक जीवन

  • जन्म: 20 जुलाई 1927

  • जन्मस्थान: सियालकोट, पंजाब, ब्रिटिश इंडिया (अब पाकिस्तान)
    राजेंद्र कुमार का मूल नाम राजेन्द्र बख्शी था। उनका परिवार विभाजन के बाद भारत आकर बस गया। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था।

फिल्मी करियर की शुरुआत

  • राजेंद्र कुमार ने अपना फिल्मी सफर 1948 में शुरू किया। उनकी पहली फिल्म थी “श्री कन्या”

  • उन्होंने मुख्यधारा की फिल्मों में काम करते हुए हिंदी सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाई।

  • 1950 और 1960 के दशक में वे रोमांटिक और नायक भूमिका के लिए सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक थे।

लोकप्रियता और उपाधि

  • राजेंद्र कुमार को हिंदी सिनेमा में कई सुपरहिट फिल्में मिलीं, जैसे “धड़कन” (1952), “मिस्टर एक्स” (1964), “काबिल” (1964), “संगम” (1964), “नीला अंबर” (1960) आदि।

  • उनकी 9 फिल्मों ने सिल्वर जुबली (एक करोड़ रुपए से अधिक की कमाई) हिट की, जिसके कारण उन्हें बॉलीवुड में “जुबली कुमार” के नाम से पुकारा गया।

अभिनय शैली और प्रभाव

  • राजेंद्र कुमार की छवि मुख्य रूप से मृदुभाषी, ईमानदार और संवेदनशील नायक की थी।

  • उनकी नेचुरल एक्टिंग, आकर्षक व्यक्तित्व और भावपूर्ण संवाद अदायगी ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया।

  • वे कई अन्य कलाकारों के साथ काम करके हिंदी सिनेमा को खुशहाल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुरस्कार और सम्मान

  • उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान मिले, जिनमें में ग्रैमी और फिल्मफेयर पुरस्कारों के अलावा, कला और फिल्म क्षेत्र में अनेक सम्मान शामिल हैं।

  • उनके योगदान को सम्मानित करते हुए 1999 में उन्हें फिल्मफ़ेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।

जीवन एवं निधन

  • राजेंद्र कुमार का निजी जीवन भी चर्चा में रहा, वे दिल से परिवार वाले थे।

  • उन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे और फिल्म इंडस्ट्री में सम्मानित स्थान बनाया।

  • उनका निधन 12 जुलाई 1999 को हुआ, लेकिन उनकी फिल्मों और अभिनय का जादू आज भी दर्शकों के दिलों में ज़िंदा है।

सारांश

विषयजानकारी
जन्म20 जुलाई 1927, सियालकोट
प्रसिद्ध फिल्में"धड़कन", "संगम", "काबिल" आदि
उपाधिजुबली कुमार
पुरस्कारफिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, अन्य
निधन12 जुलाई 1999

राजेंद्र कुमार हिंदी सिनेमा के ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपने सहज अंदाज़ और आकर्षक अभिनय से लाखों दिलों को छुआ और हमेशा याद रखे जाएंगे।

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