सैनिटरी उत्पादों से GST हटाना: महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

पृष्ठभूमि

स्वच्छता और स्वास्थ्य महिलाओं के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू हैं। विशेषकर मासिक धर्म स्वच्छता महिलाओं की सेहत, गर्भनिरोधक सुरक्षा और सामाजिक समानता से जुड़ी हुई है। भारत सहित कई देशों में लड़कियों और महिलाओं के लिए सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता और वहनीयता एक बड़ी चुनौती रही है।

GST लागू करने से पहले की स्थिति

भारत में जब GST लागू किया गया था, तब सैनिटरी नैपकिन जैसे महत्वपूर्ण सैनिटरी उत्पादों पर 12% कर (GST) लगाया गया था। इस अतिरिक्त कर ने इन उत्पादों की कीमतें बढ़ा दीं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की लड़कियां और महिलाएं उन्हें खरीदने में असमर्थ रहीं। इसके कारण मासिक धर्म के दौरान अस्वच्छता और स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिलीं।

GST हटाने का निर्णय

21 जुलाई 2018 को हुई GST परिषद की बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि सैनिटरी उत्पादों को पूरी तरह से GST से मुक्त किया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य मुख्य रूप से निम्न था:

  • महिलाओं को सुलभ और सस्ता सैनिटरी उत्पाद उपलब्ध कराना।

  • मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार लाना।

  • सामाजिक कलंक को कम करना और जनजागरूकता बढ़ाना।

  • महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।

इस निर्णय के प्रभाव

  • कीमतों में कमी: सैनिटरी नैपकिन और संबंधित उत्पादों की कीमतों में गिरावट आई, जिससे अधिक महिलाओं तक ये पहुंच सके।

  • स्वास्थ्य सुधार: मासिक धर्म के दौरान साफ सफाई बनी रहने से संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आई।

  • सामाजिक जागरूकता: महिलाओं और समाज में मासिक धर्म संबंधी विषयों पर खुले में संवाद की शुरुआत हुई।

  • शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव: स्कूल जाने वाली लड़कियों की अनुपस्थिति में कमी आई क्योंकि अब वे सैनिटरी उत्पाद उपयोग करने में समर्थ थीं।

  • महिला सशक्तिकरण: यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों और स्वास्थ्य के प्रति सरकार की समझदारी और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

निष्कर्ष

सैनिटरी उत्पादों पर GST हटाने का निर्णय न केवल आर्थिक रूप से महिलाओं को फायदा पहुंचाने वाला था, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक सम्मान के मामले में भी एक मील का पत्थर साबित हुआ। इससे यह संदेश गया कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यकताओं को समझना और उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी भी देश के विकास के लिए आवश्यक है। यह कदम भारत में महिला कल्याण नीतियों की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जाता है।

स्रोत:

  • भारत सरकार की आधिकारिक घोषणाएं

  • GST परिषद की बैठक रिपोर्ट

  • स्वास्थ्य एवं महिला विकास मंत्रालय के प्रकाशन

  • विभिन्न समाचार एजेंसियों का विश्लेषण

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